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Std Maurya

Std Maurya

@stdmaurya.392853


मत कहो हमें रटने वाले,
हम नया पैगाम रचते हैं।
काँटों से गुज़रकर हम तो,
फूलों की महक बिखेरते हैं।
धूप-छाँव को महसूस कर,
शब्दों को रंगों में उतारते हैं,
हम फसल की तरह उगते हैं।
कोई न समझे तो टूट जाते हैं,
काँटों और फूलों में हमें फर्क नहीं दिखता,
हम काँटों को भी फूल समझते हैं।"
- Std Maurya

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मत कहो हमें रटने वाले,
हम नया पैगाम रचते हैं।
काँटों से गुज़रकर हम तो,
फूलों की महक बिखेरते हैं।
धूप-छाँव को महसूस कर,
शब्दों को रंगों में उतारते हैं,
हम फसल की तरह उगते हैं।
कोई न समझे तो टूट जाते हैं,
काँटों और फूलों में हमें फर्क नहीं दिखता,
हम काँटों को भी फूल समझते हैं।"
- Std Maurya

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"नया साल है, अब नया मोड़ लाएंगे हम,
जो बीते साल के आखिरी दिन भूल गए हमें,
वादा है, नए साल में उन्हें याद भी नहीं करेंगे हम।"
- Std Maurya

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"नया साल है, अब नया मोड़ लाएंगे हम,
जो बीते साल के आखिरी दिन भूल गए हमें,
वादा है, नए साल में उन्हें याद भी नहीं करेंगे हम।"

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जो तुम सोचते हो,वही तुम करों।

मुझे शर्म आती है यह कहकर,
पढ़-लिखकर भी तुम
फ़क़ीर नेता चुनते हो,
और देश की तरक़्क़ी की उम्मीद करते हो।

मेरा देश आज़ाद है — यह जानता हूँ,
मगर मेरे देश के युवा मानसिक गुलाम हैं — यह भी जानता हूँ।
और जिस देश के युवा मानसिक गुलाम हों,
उस देश का तरक़्क़ी करना असंभव है।

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"मैं देख शर्मिंदा हूँ, अश्लीलता फैलाने वाले देश संभालने को आ रहे हैं, किन्तु पढ़े-लिखे लोग दर-दर भटक रहे हैं।" -एसटीडी

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फूल तो फूल होता है, टूट कर भी उसमे महक होता है. मगर उसे कोई समझता नहीं। इस लिए उस में गम का मुस्कान होता हैं..

-एसटीडी

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