Hey, I am on Matrubharti!

उसे भी अब दिलदार मिल गया होगा...

हमें भी अब कोई हसरत नहीं सताती है...

ये जो वक्त दिखाई नहीं देता.
ये दिखा बहुत कुछ देता है.......

जो तेरे ऐब बताता है उसे मत खोना
अब कहां मिलते हैं आईना दिखाने वाले!

जिस दिन चला जाऊँगा इस फुरकत में,
उम्मीद नहीं कोई अश्क़ बहायेगा वास्ते मेरे
दस्तूर-ए-जमाना इज़ाज़त देता नहीं इसकी,
जो हैं उसकी कद्र नहीं, जो चला गया उसकी फिक्र नहीं...

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बहुत कोशिश की, सिर्फ बारिश पर शायरी लिखूं,....

पर हर बोछार ...सिर्फ तुम्हारी याद बरसा रही है,...

उतरता नहीं है दिल से वो कोशिश के बाद भी
इक शख्स मेरी ज़ात पर, भारी है इस क़दर...

हर एक लफ्ज के तेवर ही और होते है
तेरे नगर के सुखनवर ही और होते है
तेरी आँखों में वो बात नही है ऐ दोस्त
डुबोने वाले समुन्दर ही और होते है

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ये समझ कर कि ये नेअ़मत भी किसे मिलती है
लम्हा-ए-ग़म को भी हंस-हंस के गुज़ारा हमने...

पत्थरों के तो मिज़ाज नही होते मुर्शीद...

लोग क्यूँ पत्थर मिज़ाज होते हैं ?

अदब हमारा था की हम सब सह गए...
पिघलते तो कसम से कायनात ठहर जाती..