Free Hindi Poem Quotes by Darshita Babubhai Shah | 111806915

मैं और मेरे अह्सास

मरहम बेअसर से निकले l
आशिक बेख़बर से निकले ll

मेहबूब को देखने के लिए l
फ़िर उस डगर से निकले ll

सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह

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