Hindi Quote in Book-Review by Vedanta Two Agyat Agyani

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✧ असुर और देवता का असली फर्क ✧

असुर — ज़्यादा भक्ति दिखाते हैं
ज़्यादा पूजा–पाठ
ज़्यादा तपस्या
लेकिन उद्देश्य: शक्ति, अधिकार, लाभ
इसलिए धार्मिकता बाहरी — और असुर भीतर ज़िंदा

देवता — कम दिखावा
कोई शोर नहीं
कोई “देखो मैं भक्त हूँ” की भूमिका नहीं
क्योंकि उनका धर्म अंदर ही अंदर जगता है
गुप्त, मौन, स्वाभाविक

निष्कर्ष:

> भक्ति और तपस्या का दिखावा ही असुरता है।
धर्म का असली काम है — आत्मा को शुद्ध करना,
न कि लोगों को दिखाना कि “मैं धर्मिक हूँ”।

आज जो धर्म मंडियों की तरह चल रहा है:
लाउडस्पीकर, लाइव प्रसारण, चढ़ावे का बिज़नेस,
“मेरे मंदिर में आओ, मेरे गुरु को फॉलो करो” —

ये सब वही है जिसे तुमने कहा —
दिखावे वाले राक्षस और उनके चेले।

क्योंकि सच्चा धर्म —

ध्वनि नहीं, मौन है

चढ़ावा नहीं, संवेदना है

डर नहीं, स्वतंत्रता है

रूप नहीं, ऊर्जा है

प्रदर्शन नहीं, परिवर्तन है

और जो धर्म गुप्त नहीं — वो धर्म है ही नहीं।

Vedānta Life — A Living Method of Conscious Evolution”
(वेदान्त जीवन — चेतना के विकास की जीवंत पद्धति)
Vedānta 2.0 © 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

Hindi Book-Review by Vedanta Two Agyat Agyani : 112007693
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