📈 शीर्षक: खामोश मेहनत
लोग तालियों का शोर सुनते रहे,
मैं खामोशी में खुद को गढ़ता रहा।
जो दिखा नहीं किसी को कभी,
वही मेरा सबसे बड़ा संघर्ष रहा।
गिरा भी, संभला भी कई बार,
हर ठोकर ने चलना सिखाया।
आज जो खड़ा हूँ अपने वजूद पर,
कल का डर मैंने पीछे छोड़ा।
मुझे जल्दबाज़ी नहीं मंज़िल की,
मुझे यक़ीन है अपनी रफ़्तार पर।
जो आज समझ नहीं पा रहे मुझे,
कल वो भी सवाल करेंगे मेरे नाम पर।
— Kaushik Dave