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कोई एक व्यक्ति से हमें बुरा अनुभव होता है, फिर हम सभी इंसानों को बूरा समझने लगे, तो फिर गलतियां हमसे ही होगी। हर एक इंसान में अच्छाई या बुराई ही पनपतीं है, वह ग़लत बात है। किसी में अच्छाई भी पनपतीं है तो किसी में बुराई। अच्छे इंसानों पर भी आप भी बूरे होगे, वह प्रश्न कब पैदा होता है। मालूम है? जब बुराई अच्छाई का नक़ाब पहनकर पहले पास आती है, फिर वह अपने वास्तविक रूप में आकर असली रूप दिखलातीं है। तब वह पीड़ित इंसान, सभी अच्छे इंसानों को भी बूरा समझने लगता है। किन्तु कुछ विवेक शक्ति भी होनी चाहिए, अच्छाई और बुराई को समझने की। एक बार धोखा खाए हुए इंसान में वह समझ अच्छी तरह आ जानी चाहिए। रावण ने सीतामाता का हरण, साधु वेश धारण करके किया, वह रावण की नियत और सोच खराब थी, साधु और साधुत्व नही। इसलिए जिंदगी में नक़ाब पहनें मिलते रहते हैं चहेरे, आज़मा लेना चाहिए जरुर, असलियत के दिख जाते है चहेरे।
जिंदगी में मुश्किल समय एक Puzzle की तरह होता है। समाधान भी मिलता है, शांत दिमाग और स्थिर ह्रदय से सोचने पर कोई भी विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ता मिलता हैं।
वह कानून हमेशा 'अधूरा' रहता है। जो बच्चे को 'बिस्कुट की चोरी' में, जेल में बंद कर दे, जबकि उस बच्चे को उसके हक के पैसे, ना देने वाले वेपारी के 'अन्याय पर मौन' रहे। इंसाफ का तराजू 'तटस्थ, सम्मानित और सत्य' पर टीका होना आवश्यक है।
जो मन को शांत ना कर सके, कोई बात नहीं, किन्तु मन को अशांत करे। जो खुशी ना दे पाए कोई बात नहीं, पर हृदय भीतर बोझ पैदा करे। जो विवेक को मार दे, या दयाभाव से दूर करे , उन्हें छोड़ देना ही हमारी बुद्धिमत्ता की पहचान होगी । फिर चाहे वो कर्म हो, विचार हो या फिर, कोई अपना व्यक्ति हो। त्याग ही उचित है, वरना हमें दुःख, दर्द ही मिलेगा।
जनता प्रश्न पुछे और शासक प्रत्युत्तर सही से देते है, कानून अमीरों को भी ना छोड़े गरीब को न्याय देता हो। बच्चे रास्ते पर तिरंगे बेचें नहीं बस लहराते जातें हो, तब शासक, प्रजा सही अर्थ में प्रजासत्ताक पर्व मनाते है। - Parmar Mayur
इंसान कोई भी विषय में उसका का 'मत और मंतव्य' कैसे देता है, उससे ही उस इंसान की 'विवेक बुद्धि' की पहचान हो जाती है। - Parmar Mayur
एक सवाल बार-बार दिल को दर्द दे जाता है। जो किस्मत में हे वो तो मिल ही जाता है, सब कहते हैं, पर उनका क्या?जो एक-दूजे के दिलों में रहते हुए भी पास रहे नहीं। - Parmar Mayur
एक लड़की ने कहां; चिड़िया को पूरा आसमान दिखाकर, उनके पंख काटने नहीं चाहिए।
किसी का असली चेहरा देखकर भी तुम 'नफरत' ना कर पाए, तुम चिंतीत मत हो तुमने उसे नहीं उसने तुम्हें 'खो' दिया। - Parmar Mayur
हमारे जीवन के प्रत्येक पल बहुत कीमती है। फिर उन लम्हों को ऐसे ही क्यूं बर्बाद करना चाहिए? समय का रिवर्स गियर नहीं होता है, तो फिर जिंदगी मिलेंगी ना दोबारा। प्रत्येक पलों को हंसी खुशी से बिताना चाहिए। जो सच्चे,बच्चे और बूढ़े हैं, उनके साथ थोड़ा वक्त बिताना चाहिए। खुशीयों अपने-आप दुगुनी होगी। किसी के दर्द को सुनकर सच्चे अर्थ में, दवाई बनना चाहिए। किसी के दुःखों के कारण नहीं, किन्तु दर्द निवारक बनाना चाहिए। जिंदगी का हर एक लम्हा एक उत्सव की तरह लगेगा, जब हमारे हृदय में निस्वार्थ, ईर्षा रहित खुशी जन्म लेंगी। बस जिंदगी को कुछ इस तरह जीना चाहिए।
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