बोलती नहीं, फिर भी लफ़्ज़ कहते हैं — वो ढमक है,
मेरा मौन भी बहुत सी बातें कहता है — वो ढमक है।
मैं टूटकर भी कभी बिखरी नहीं,
वक़्त के सामने खड़ी रहने वाली रहती है — वो ढमक है।
नज़रें झुकी हैं, मगर हिम्मत अब भी ज़िंदा है,
कम शब्दों में गहरा अर्थ बहता है — वो ढमक है।
कोई पूछे अगर इस शायरी के पीछे का नाम,
हल्की-सी मुस्कान से कह देना — वो ढमक है।
DHAMAK😂
(શાયરી)