मोहब्बत कभी अतीत का हिस्सा नहीं बनती,
वह बस एक एहसास नहीं एक मौजूदगी होती है।
वह रहती है… चुपचाप, गहरी, अडिग।
आप शहर बदल लें, देश छोड़ दें,
ज़िंदगी में कितने ही बड़े बदलाव क्यों न ले आएँ,
खुद को काम में डुबो दें,
लोगों की भीड़ में खो जाएँ
मोहब्बत अपनी जगह से ज़रा भी नहीं हिलती।
वह दिल के किसी कोने में
ठहरी हुई साँस की तरह बस जाती है।
मोहब्बत और “मूव ऑन” का कोई रिश्ता नहीं होता।
मूव ऑन ज़िंदगी करती है,मोहब्बत नहीं।
आप यूँ ही चाय या कॉफी पीते हुए
किसी कहानी या फ़िल्म का एक दृश्य देख लें,
कोई अधूरा-सा गाना सुन लें,
राह चलते किसी पुराने कागज़ के टुकड़े पर
सिर्फ “मोहब्बत” शब्द लिखा हुआ पढ़ लें
और अचानक…आपके ज़हन में वही चेहरा उभर आएगा क्योंकि मोहब्बत भूलने से नहीं मिटती,
वह बस यादों के साथ जीना सीख लेती है।
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