हेडलाइन: क्या नफ़रत भी कभी प्यार का रास्ता बन सकती है? ❤️🔥
पोस्ट कंटेंट:
एक रूड और पत्थर दिल बॉस— विराज मल्होत्रा, जिसे सिर्फ जीतना आता है।
एक स्वाभिमानी और जज्बाती लड़की— काव्या, जिसके लिए उसका आत्म-सम्मान ही सब कुछ है।
जब काव्या ने अपना इस्तीफा विराज की मेज पर पटका, तो उसे लगा कि वह आज़ाद हो गई। पर उसे क्या पता था कि असली खेल तो अब शुरू होने वाला है!
"15 दिन मेरे घर पर, मेरी नज़रों के सामने... क्या काव्या विराज के छिपे हुए दर्द को पहचान पाएगी?"
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लेखक: दिप्ती गुर्जर