कविता रोने की आजादी है
जब रोने का जी करें
तो रो लो
ठहरे हुए आंसू आंखों में रहकर
जहर बन जाएंगे
इससे पहले रो लो
जी भर रो लो
इससे पहले की तुम्हारा जी किसी को मारने के करें
रो लो
जब रोने का जी करे तो रो लो
इससे पहले की तुम्हें
जग के साथ-साथ खुद से नफरत हो जाए
रो लो
तुम्हारा दर्द तुम्हें खो जाए
इससे पहले तुम रो लो
जी भर रो लो
दुनिया भर के गम लेकर
तुम लाचार हो यह भरम लेकर
तुम खुद के नशे काटो
इससे पहले रो लो
रोने से शायद तुम हल्का महसूस करोगी
इसलिए रो लो
जी भर रो लो
चेक चेक कर रो लो
हां तुम रो लो
सायद रोने से मन में बिछे नफरत काम हो जाए
इसलिए रो लो
शायद रन के बाद जीने का इच्छा करें
इसलिए रो लो
शायद रन के बाद जीने की कोई उम्मीद मिल जाए
इसलिए रो लो
जी भर तुम रो लो
सारे थकान खत्म हो जाएंगे
इसलिए रो लो
तुम रो लो जी भर रो लो
जिंदा रहने के लिए
घुट घुट कर कब तलक जिओगे
जो जहर है दिल के अंदर वह बाहर निकालो
खुद से भी बोलो
अगर कोई नहीं है सुनने वाला
खुद के जख्मी दिल को डटोलो
और जी में जो आए बोलो
तुम रो लो
खुद को तुम प्यार से सहलाओ
खुद को तुम खुद ही गले लगाओ
और खुद को और रोने दो
दर्द थोड़ी कम होंगे
और तुम फिर से मुस्कुराने के लिए नज़रें उठा होगी
शायद और ज्यादा मुस्कुराओगी
हां तुम रो लो
जब तक जी चाहे रो लो
किसी चीज की आजादी हो या ना हो
तुम्हें रोने की आजादी है
तुम रो लो
जी भर रो लो
और फिर आओ उठो
और खुद को संभालो
रहा लंबी है दर्द गेहरा है
फिर भी चलना है
डगमगाते कदम लेकर
कापते बदन लेकर
रोते हुए तुम्हें खुद को संभालना है
हां तुम रो लो
पर खुद को संभालो
रोने की आजादी है
तुम रो लो
जी भर रो लो
आगर ऐ कविता अच्छी लगे तो आगे पढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯