तन्हाई का सच।
दिल ना लगाना कभी दिलदार सारे झूठे हैं,
कसमें वादे किया था मुझे वो सारे झूठे हैं।
चेहरों की सादगी में छुपे वो इरादों का ज़हर,
मुस्कान ओढ़े हुए सबके सब नज़ारे झूठे हैं।
जो हमारे अपने ही थे साँसों के करीब कभी,
मुश्किल वक़्त में वो नदी के किनारे झूठे हैं।
रिश्तों के नाम पर जो मिले थे हमको कभी,
वक़्त ने दिखा ही दिया सारे सहारे झूठे हैं।
इश्क़ की राह में जितने भी मिले हमसफ़र,
जो साथ चलने के सब के सब इशारे झूठे हैं।
अब तो “प्रसंग” समझा तन्हाई के शहर में,
रूह से जो भी करीब आए वो सारे झूठे हैं।
- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर