अब हम दस्त में मानिंद-ए-सूखे सजर हैं
हम पे इश्क़ की बौछार बेकार है
आँसुओं का अब नहीं होता कोई असर है
ज़ब्त-ए-ग़म की हर दीवार बेकार है
ख़्वाब सब राख हुए, बुझ गई है सहर है
सूरज की अब ये रफ़्तार बेकार है
तय कर चुके हैं हम तन्हाई का सफर है
मंज़िल का अब इंतज़ार बेकार है
- known stranger