कभी मात्र एक व्यक्ति के चले जाने से ही
कुछ लोग उन्मत्त हो उठते हैं,
और उन्हीं सरफिरे उन्मादों को
दुनिया कवि, शायर और काव्य-प्रणेता कहती है।
कभी कोई विरह
शब्दों में आकार ले लेता है,
कभी कोई निःशब्दता
ग़ज़ल बनकर बह उठती है।
जो अश्रु बहा नहीं पाते,
वे अक्षरों में ढलने लगते हैं,
और जो अक्षरों में ढलते हैं
वो कालातीत हो जाते हैं।
हर वेदना की कोख से
एक कविता जन्म लेती है,
हर विखंडन में
कोई रचना सुसज्जित हो उठती है।
वो जो किसी हृदय का बिखराव था,
वही सृजन का प्रथम स्पंदन बन जाता है।
— ArUu ✍️