हत्या करना तो पाप है न
चाहे वो किसी की भावनाओं की हो
या फिर संवेदनाओं की
किसी के भरोसे की हो,
उसके यकीन की
किसी के सपनों की हो,
उसके अपनेपन की
किसी के सुकून की हो,
उसकी मुस्कान की
किसी की नींदों की हो,
उसके ख्वाबों की
किसी की रूह की हो,
उसके अहसासों की
किसी के कल की हो,
उसके हर आज की
किसी के हौसले की हो,
उसके इरादों की
किसी की पहचान की हो,
उसके वजूद की
किसी के प्रेम की हो,
या उसकी आजीवन प्रतीक्षा की