Dear girls,
जब तुम माँ बन जाओ,
तो अपने बेटों को सिखाना
औरत का सम्मान कैसे किया जाता है।
सिखाना—
कैसे उसके नियमित कामों की कद्र की जाए,
कैसे “ये तो उसका काम है”
जैसी सोच को खत्म किया जाए।
उन्हें ये भी सिखाना
कि औरत महज़ एक वस्तु नहीं होती,
वो भी उतनी ही इंसान है
जितना वो खुद हैं।
सिखाना—
औरतों के काम में हाथ बँटाना,
और उससे भी ज़्यादा
उसके काम को समझना।
सिखाना—
ना का मतलब ना होता है,
और खामोशी
हमेशा हाँ नहीं होती।
सिखाना—
आवाज़ ऊँची करने से
कोई बड़ा नहीं हो जाता,
और सम्मान माँगना नहीं,
देना सीखा जाता है।
क्योंकि कल वही बेटे
किसी की दुनिया होंगे…
और ये तुम पर है
कि वो दुनिया बनें—
या किसी की दुनिया उजाड़ दें।