तुम पर मैं मार जाऊंगी
कविता
अब गलतियां कर जाऊंगी
तुम पर मैं मर जाऊंगी
तुम्हारे लिए मेरी जिंदगी रश्मि है
और इस रेशम की डोरी से बंधी हुई इकश मेरी है
अब कहे दूंगी दिल में जो मेरी है
अब छिपाना मुश्किल है
दिल लगा कर
और बहान लगाना मुश्किल है
अब तुम्हारे पास आना चाहती हूं
तुम्हारी बाहों में सोना चाहती हूं
अब तुमसे दूर रहना मुश्किल है
दुनिया जो कहे अब मुझे परवाह नहीं
बहुत छुपा ली दिल की बातें
इस दुनिया से
अब यह दुनिया खफा हुए तो हुए
मुझे अब इश्क को जाहिर करना है
तुम्हारे पास आना है
तुमसे दिल लगाना है
अब और मुश्किल लगता है
तुम्हें देखकर ही दिन गुजरा
अब और मुश्किल लगता है
तुमसे मिलकर भी दूर रहना
अब मुझे दिल की बातें अपनी तुमसे कहना है
कहना है मुझे
जो दिल में मेरी है
सुनने के बाद शायद तुम इनकार कर दो
पर मुझे एक बार इतनी हिम्मत तो लानी है
दुनिया की परवा छोड़कर
तुम्हारे कदमों साथ अपनी कदम बढ़ाना है
अब छोड़ देनी है वो धागे अपने हाथों से
जो मुझे हाया में बांधे रखता है
अब लज्जा की चुनरी अपने सर से हटाकर
अपने हाथ तुम्हारे हथेली की तरफ बढ़ाना है
मुझे यह गलती करनी है
उसके बाद इस इश्क की
परिणाम भी स्वीकार होगी मुझे
तुम्हारा हां भी और ना भी स्वीकार होगी मुझे