शब्द के चित्र कवि सुंदर बनाते हैं ....
शब्द के चित्र कवि सुंदर बनाते हैं ।
जगत को सत्य का दर्पण दिखाते हैं।
भावना के सिन्धु में लगा कर गोते।
भूमिका कर्तव्य की खुद निभाते हैं।।
वेदना से भरा जग है बड़ा निर्मम।
कवि तब घावों में औषधि लगाते हैं।।
आँधियों से लड़ रहे हैं कबसे सभी।
चेतना के भाव जग को सुझाते हैं।
हटाकर निराशाओं की बदलियों को।
दिल में विश्वास का दीपक जलाते हैं।।
मनोजकुमार शुक्ल 'मनोज'