thoda gaor Kiya jae , shyd ye kahani bohot ki h...
सोच रही हूँ,
कि छोड़ दूँ
छोड़ दूँ अब इतना सोचना,
छोड़ दूँ सीधी बातों को मोड़ना,
बस छोड़ दूँ अब..
आख़िर कब तक,
ना जाने कब तक ये साँसें चलेंगी,
कब तक मन में बीती बातें चलेंगी,
कब तक ये अनचाही यादें चलेंगी,
आख़िर कब तक...
चलो आज थोड़ा जिया जाए,
ग़मों को भुलाकर,
खुशियों को पिया जाए।
चलो आज पुराने ज़ख्मों को सिया जाए,
चलो
आज जिया जाए....
एक कोशिश करते हैं,
एक कोशिश करते हैं उभरने की,
लंबी साँसें भरने की,
कोशिश करते हैं आगे चलने की,
चलो
बात ख़त्म करते हैं मरने की,,
आज देख ही लेते हैं,,
आज देख ही लेते हैं
जी कर,
देख ही लेते हैं उम्मीदों का सहारा पी कर।
चलो आज थोड़ा जी ही लेते हैं,
मरने के इंतज़ार में.....
ये इंतज़ार लाचार में,
और लाचारी के बाज़ार में।
चलो फिर भुला दें इन बातों को,
उन्हीं दबी बातें हज़ार में......
—Ankahi
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