पहली बार पत्थर की मूर्ति पर भरोसा कर रही हूं
मेरा भरोसा टूटने मत देना माधव।
इतना टूट चुकी हूं तुम्हारी बनाई सृष्टि के जीवो पर विश्वास नहीं होता
मुझ पर अनेक उंगलियां उठ चुकी है
उनका जवाब मुझे अपने परिणाम से देना है
अब बात मेरे चरित्र पर आ गई है गोविंद
एक कागज का टुकड़ा मेरा भविष्य निर्धारित करेगा
✍️ अंतिमा 😊