Hindi Quote in Poem by prachi tanwar

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"ज़िंदगी: एक किताब"

बैठे-बैठे आज मैं अपनी किताब के पन्ने पलट रही थी...
कुछ समझ आया तो आगे बढ़ी, न आया तो
फिर समझने को उन्हीं पन्नों को उलट रही थी...

तभी दिल में एक ख़याल आया
क्या जीवन भी एक किताब है?
जिसे पढ़ने के लिए आगे बढ़ना पड़ता है...
और बढ़ जाएँ आगे, तो समझने को
कभी-कभी पीछे मुड़ना पड़ता है...

फिर सोचा, ये जो स्याही है इन पन्नों पर,
ये किस की निशानी है?
क्या ये मेरे ही अश्क़ हैं जो लफ़्ज़ बन गए?
या वक़्त ने अपने हाथों से लिखी कोई कहानी है?

कुछ पन्ने हवा के झोंके से खुद ही पलट जाते हैं,
कुछ को ज़बरदस्ती मोड़ना पड़ता है।
कुछ पर उँगली फिसल जाती है,
कुछ पर रूह अटक जाती है।

हर अध्याय में एक रिश्ता है,
कोई पहला प्रेम, कोई आख़िरी अलविदा।
कुछ पन्ने फट गए, कुछ जले हुए हैं,
पर सबसे खूबसूरत वही हैं
जिन पर अब भी मेरी उँगलियों के निशान हैं।

और आख़िर में समझा...
मैं हूँ इस किताब की लेखिका।
पर सब पन्ने मेरे लिखे नहीं।
कुछ तक़दीर ने लिखे, कुछ लोगों ने,
कुछ उन लम्हों ने जो लौट कर नहीं आएँगे।

फिर भी रोज़ सुबह एक नया पन्ना खुल जाता है,
कोरा, बिना स्याही के।
और क़लम मेरे हाथ में है |
प्राची तंवर….

Hindi Poem by prachi tanwar : 112027914
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