Hindi Quote in Thought by Praveen Kumrawat

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बुराई की अंधी चेन

“दुनिया बहुत ख़राब हो गई है...”
यह लाइन आपने भी किसी न किसी से ज़रूर सुनी होगी, या शायद खुद कही होगी। लेकिन कभी शीशे के सामने खड़े होकर खुद से पूछा है कि इस दुनिया को बुरा बनाने में हमारा अपना कितना हाथ है?

असल में हम सब एक अजीब मानसिक चक्रव्यूह में जी रहे हैं। जब हमसे कोई ग़लती होती है, तो हमारे पास मजबूरियों, हालातों और पारिवारिक तनाव के बहानों की पूरी लिस्ट तैयार होती है। हम खुद को तुरंत ‘निर्दोष’ मान लेते हैं। लेकिन जब वही ग़लती कोई दूसरा करता है, तो हम उसकी परिस्थितियों को जाने बिना, पल भर में उसे ‘गुनहगार’ घोषित कर देते हैं।

इसी दोहरे रवैये से जनमती है ‘बुराई की अंधी चेन।’ जहाँ समाज का हर इंसान खुद को एक ‘बेचारा पीड़ित’ समझ रहा है और सामने वाले को ‘विलेन।’ हर कोई किसी न किसी से बदला ले रहा है, कोई किसी पर ग़ुस्सा निकाल रहा है, और नफ़रत का यह अंतहीन सिलसिला चलता जा रहा है।

इस चेन को तोड़ने का सिर्फ एक ही तरीक़ा है— दूसरों को जज करना बंद कीजिए। किसी पर उंगली उठाने से पहले, एक पल के लिए खुद को उसकी जगह पर रखकर देखिए। जब आप हर बात पर तुरंत रिएक्ट करना छोड़ देते हैं और अपनी ग़लतियों की ज़िम्मेदारी खुद लेते हैं, तो आप अनजाने में नफ़रत की इस अंधी चेन को तोड़ देते हैं। याद रखिए, दुनिया को बदलने की शुरुआत हमेशा खुद को बदलने से होती है।
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Hindi Thought by Praveen Kumrawat : 112028150
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