Hindi Quote in Story by Raju kumar Chaudhary

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📖 सफलता की कीमत

Episode 1: सपना जो भूख से बड़ा था

सुबह के पाँच बजे थे।

नेपाल के पर्सा जिले के एक छोटे से गाँव में सूरज की पहली किरणें धीरे-धीरे धरती को छू रही थीं। पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी, लेकिन एक टूटी हुई झोपड़ी के अंदर अभी भी सन्नाटा था।

झोपड़ी की छत जगह-जगह से टूटी हुई थी। बरसात में पानी टपकता था और गर्मियों में धूप सीधे अंदर आ जाती थी।

उसी झोपड़ी में रहता था एक लड़का—आरव।

उम्र लगभग सोलह साल।

चेहरा साधारण था, लेकिन आँखों में कुछ असाधारण था।

एक ऐसा सपना, जो उसके गाँव के किसी भी लड़के ने कभी नहीं देखा था।

आरव की आँख खुली।

उसने सबसे पहले अपनी माँ को देखा।

माँ कोने में बैठी पुरानी साड़ी सिल रही थीं।

उनकी उंगलियों में सुई चुभ रही थी, लेकिन चेहरे पर दर्द नहीं था।

क्योंकि गरीबी में दर्द महसूस करने की भी फुर्सत नहीं होती।

"माँ, आप सोई नहीं?" आरव ने पूछा।

माँ मुस्कुराईं।

"अगर मैं सो जाऊँगी तो घर कैसे चलेगा बेटा?"

आरव चुप हो गया।

यह वही जवाब था जो वह बचपन से सुनता आया था।

उसने इधर-उधर देखा।

घर में खाने को कुछ नहीं था।

बस एक खाली डिब्बा रखा था जिसमें कभी चावल हुआ करते थे।

आरव का दिल भारी हो गया।

वह जानता था कि माँ ने कल रात खाना नहीं खाया था।

लेकिन फिर भी उन्होंने उससे कहा था—

"मुझे भूख नहीं है बेटा।"

गरीब माँएँ अक्सर यही झूठ बोलती हैं।

ताकि उनके बच्चे चैन से खा सकें।

आरव बाहर निकल आया।

गाँव के बच्चे खेल रहे थे।

कुछ लोग खेतों की ओर जा रहे थे।

कुछ लोग चाय की दुकान पर बैठे राजनीति की बातें कर रहे थे।

लेकिन आरव की दुनिया अलग थी।

वह सीधे गाँव के पुराने स्कूल की ओर चल पड़ा।

स्कूल की दीवारें टूटी हुई थीं।

खिड़कियों के शीशे नहीं थे।

लेकिन आरव के लिए वही दुनिया की सबसे बड़ी जगह थी।

क्योंकि वहीं से उसके सपनों की शुरुआत हुई थी।

स्कूल के मैदान में पहुँचकर वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया।

उसने अपना पुराना बैग खोला।

उसमें सिर्फ तीन किताबें थीं।

बाकी किताबें खरीदने के पैसे नहीं थे।

अचानक उसकी नजर जमीन पर पड़ी एक पुरानी पत्रिका पर गई।

शायद किसी ने फेंक दी थी।

उसने उठाकर देखी।

कवर पर एक बहुत बड़ी कंपनी के मालिक की तस्वीर थी।

उस आदमी के पीछे ऊँची-ऊँची इमारतें थीं।

महंगी गाड़ियाँ थीं।

और हजारों लोग उसके लिए काम करते थे।

आरव उस तस्वीर को देर तक देखता रहा।

फिर धीरे से बोला—

"एक दिन मैं भी ऐसा बनूँगा।"

तभी पीछे से आवाज आई—

"अरे सुनो, अरबपति साहब!"

पूरी क्लास हँसने लगी।

वह उसका सहपाठी रोहित था।

"पहले अपने फटे जूते तो ठीक कर लो।"

सभी बच्चे जोर-जोर से हँसने लगे।

आरव ने अपने जूतों की तरफ देखा।

सचमुच वे जगह-जगह से फटे हुए थे।

लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।

उसने सिर्फ पत्रिका को अपने सीने से लगा लिया।

क्योंकि कुछ सपने मजाक से बड़े होते हैं।

कुछ देर बाद शिक्षक कक्षा में आए।

उन्होंने बच्चों से पूछा—

"तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?"

किसी ने कहा डॉक्टर।

किसी ने कहा पुलिस।

किसी ने कहा शिक्षक।

फिर शिक्षक ने आरव की ओर देखा।

"और तुम?"

पूरी कक्षा उसकी ओर देखने लगी।

आरव धीरे से खड़ा हुआ।

फिर बोला—

"मैं देश का सबसे सफल बिजनेसमैन बनना चाहता हूँ।"

कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।

फिर पूरी कक्षा ठहाकों से गूँज उठी।

"ये?"

"सबसे बड़ा बिजनेसमैन?"

"इसके घर में खाना नहीं होता!"

हँसी बढ़ती गई।

लेकिन आरव शांत खड़ा रहा।

शिक्षक भी उसे आश्चर्य से देख रहे थे।

"क्यों बनना चाहते हो?" शिक्षक ने पूछा।

आरव की आँखें भर आईं।

उसने कहा—

"क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरी माँ भूखी सोए।"

पूरा कमरा अचानक शांत हो गया।

अब कोई नहीं हँस रहा था।

उस दिन पहली बार सबने आरव की आँखों में सपना देखा।

एक ऐसा सपना जो मजाक नहीं था।

एक ऐसा सपना जो उसकी जिंदगी बन चुका था।

शाम को वह घर लौटा।

लेकिन घर पहुँचते ही उसे कुछ अजीब लगा।

माँ बाहर नहीं थीं।

वह अंदर भागा।

माँ जमीन पर बैठी थीं।

उनके चेहरे पर कमजोरी साफ दिखाई दे रही थी।

"माँ!"

आरव घबरा गया।

"क्या हुआ?"

माँ मुस्कुराईं।

"कुछ नहीं बेटा।"

लेकिन पड़ोस की एक बूढ़ी महिला बोली—

"दो दिन से ठीक से खाना नहीं खाया है।"

आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई।

उसे लगा जैसे किसी ने उसके सीने पर पत्थर रख दिया हो।

उसने पहली बार खुद को असहाय महसूस किया।

उस रात वह सो नहीं पाया।

बार-बार उसे माँ का चेहरा दिखाई दे रहा था।

रात के करीब बारह बजे वह झोपड़ी से बाहर निकला।

आसमान तारों से भरा हुआ था।

वह खेतों की ओर चला गया।

वहाँ खड़े होकर उसने आसमान की तरफ देखा।

उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

लेकिन उसी समय उसके अंदर कुछ बदल गया।

उसने अपने आँसू पोंछे।

और पहली बार खुद से एक वादा किया।

"मैं गरीबी से हार नहीं मानूँगा।"

"मैं सफल बनूँगा।"

"चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े।"

हवा तेज चलने लगी।

मानो किस्मत उसकी बात सुन रही हो।

उसे नहीं पता था कि यह रास्ता आसान नहीं होगा।

उसे नहीं पता था कि सफलता उसे मिलेगी जरूर...

लेकिन उसके बदले उसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

और वह कीमत सिर्फ पैसे की नहीं होगी...

बल्कि उन लोगों की होगी जिन्हें वह सबसे ज्यादा प्यार करता था।

उस रात आरव ने जो कसम खाई...

वही उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी शुरुआत बनने वाली थी।

जारी रहेगा...

अगले एपिसोड में:

"भूख और किताबों का सौदा"

जब आरव अपनी पढ़ाई बचाने के लिए अपनी सबसे प्रिय चीज बेचने का फैसला करेगा, तब उसकी जिंदगी में एक ऐसा व्यक्ति आएगा जो उसके भविष्य की दिशा बदल देगा। 💔📚�

Hindi Story by Raju kumar Chaudhary : 112028360
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