भीड़ का हिस्सा बनने का कोई चाव नहीं,
सबको खुश कर पाऊँ, ऐसा मेरा स्वभाव नहीं।
दुनिया के तराजू में खुद को तौलने नहीं आए,
हम यहाँ किसी और की बोली बोलने नहीं आए।
ज़िंदगी जीने आए हैं, कोई जंग जीतने नहीं,
सपनों के रंगों से भरने आए हैं, यूँ ही बीतने नहीं।
साँसों की इस रवानी को खुद से सँवारना है,
हर एक लम्हे को जी भरकर निहारना है।
दूसरों की उम्मीदों की गठरी क्यों कंधों पर उठाएँ?
खुदा ने पंख दिए हैं, तो क्यों न खुलकर उड़ जाएँ?
सपनों के कुछ अधूरे पन्ने पूरे करने आए हैं,
हौसलों की स्याही से अपनी तकदीर लिखने आए हैं।
शिकायतें लाख करे ये ज़माना तो करने दो,
हवा का रुख चाहे जो हो, हमें बस उड़ने दो!