थके हो तो सुनो
तुम अकेले नह ींहो
कविता
थके हो तो सुनो थोड़ा आराम कर लो
आराम करना आलस नहीं है
दिल में बहुत कुछ दबे है तो बोलो
दिल की बात बताना कमजोरी नहीं है
अगर रोना आता है तो रो लो जी भर रो लो
रोना कोई गुनाह नहीं है
तुमसे कोई नहीं कहेगा कि तुम विक्टिम कार्ड प्ले कर रहे हो
बस कहाँ एक बार मैं थक गया हूं
और मैं आराम करना चाहता हूं
मुझे गले लगाओ मैं तुम्हारे बाहों में सोना चाहता हूं
तुम्हारी कमजोरी को कोई नहीं जाचेगा
नहीं तो तुम्हारी गलती को कोई गिनबाने बैठेगा
बस वह तुम्हारे साग तुम्हारे गम में तुम्हारे हो ले गा
तुम्हारी गलतियों को भूल कर तुम्हें गले से लगाएगी
तुम्हें प्यार से गले लगाएगा कोई तो होगा
मत दिखाओ अपनी कठोर चेहरा हर बार
जो तुमसे प्यार करता है
उसके आगे थोड़ा नरम रहना कोई कमजोरी नहीं