अहंकार की डूब
एक सीख भरी कहानी
एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ यात्रा के लिए निकला। थोड़ा कम पढ़ा-लिखा था। पर जिद्दी था, बात किसी की नहीं मानता था। करता अपने मन की था। हमेशा एक लाठी लेकर चलता था। चलते-चलते बीच में पड़ी एक नदिया। उसके साथ थे तीन बच्चे और उसकी घरवाली। लाठी को पानी में डालकर, लगा नापने गहराई। वो केवल पाँच फुट ही आई। बड़ा हिसाब उसने लगाया, सब परिवार जनों की लंबाई जोड़ 12 फुट पाया। सोचा उसने नदी तो पांच फुट गहरी है, और मेरे परिवार की औसत लंबाई 12 फुट है तो हम सब नदी पार कर सकते हैं, कोई नहीं डूबेगा। पहला बच्चा और दूसरा, दोनों दो फुट के थे। तीसरा तीन फुट का और उसकी घरवाली 5 फुट की थी। बोला सबसे - चलो नदी पार करते हैं, कोई नहीं डूबेगा। मैंने हिसाब लगा लिया है। घरवाली ने मना किया लेकिन वो नहीं माना। उसने अपनी पत्नी को मूर्ख बताकर हँसी उड़ाई उसकी। और सबको आदेश दिया कि चलो, कुछ नहीं होगा, मैंने हिसाब लगा लिया है। जैसे ही सब नदी पार करने लगे, सब डूब गए, वो भी डूबने वाला ही था। मदद के लिए चिल्ला रहा था। अपनी लाठी दिखाकर बचाओ-बचाओ, शोर मचा रहा था। उधर से एक मछुआरा जा रहा था, उसकी नजर पड़ी तो वह लाठी पकड़कर उसे बाहर खींच लाया। बाहर आकर रोने लगा, मछुआरे से बोला - "सारे डूब गए, मैं अकेला बच गया।"लेकिन एक बात समझ नहीं आती "हिसाब ज्यों का त्यों, कुनबा डूबा क्यों"। उसने सारी बात मछुआरे को बताई। उसने अपना सिर पीट लिया। और उस अकल के दुश्मन की उसी लाठी से की खूब पिटाई। और बोला अब समझ आया कुनबा क्यों डूबा।मछुआरा बोला - "तुम्हारे अहंकार ने सबको डुबोया। लाठी से गहराई नापी जाती है, जिंदगी नहीं। औसत निकालने से सब पार नहीं होते। जिसकी लंबाई कम थी, वो डूब गया।" वह व्यक्ति बहुत पछताया पर अब क्या हो सकता था। सब कुछ खो चुका था।
"औसत से जिंदगी नहीं चलती...
लाठी से नदी की गहराई नापी जा सकती है, रिश्तों की नहीं।
अहंकार में लिया गया एक गलत हिसाब, पूरा परिवार ले डूबा।
किसी की सुन लेना कमजोरी नहीं, समझदारी है। 🙏
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डॉ वंदना शर्मा