मैं भी दूसरों के लिए रोए
क्या कभी किसी और के लिए रोया है
मैं जिंदगी भर सोचती रही मैं सेल्फिश
इसमें दो राय नहीं है
मैं सचमुच में सेल्फिश हूं
खुद की आजादी के लिए मैं दुनिया छोड़ सकती हुं
और वसी अगर किसी को अपनी मानलु तो
उसके लिए मैं खुद को तोड़ दूं
मै ऐसे ही हुं
थोड़ी सी जिद्दी थोड़ी सी बेपरवाह
थोड़ी सी पागल
लोग मुझे मतलबी कहते हैं
पर मैं भी दूसरों के लिए रोती हुं
मेरे सीने में भी दिल ही है पत्थर नहीं
और यह दिल इंसानी जज्बातों से भरी हुई है
हां मैं भी दूसरों के लिए रोया
और बहुत रोया