कभी ज़िंदगी में अगर राह भटक जाओ और अपनी गलती का एहसास हो जाए, तो माफ़ी माँगने का साहस ज़रूर करना। क्योंकि गलती से बड़ा इंसान का अहंकार होता है, और उससे भी बड़ा उसका सच स्वीकार करने का हौसला।
याद रखना, माफ़ी माँगने में हुई देर अक्सर किसी अपने का भरोसा तोड़ देती है। लेकिन अगर उसी पल सच कह दिया जाए, बिना किसी बहाने के, तो शायद सामने वाला नाराज़ हो, दुखी भी हो… मगर आपकी सच्चाई और पश्चाताप को ज़रूर समझेगा।
विश्वास टूटने में एक पल लगता है, लेकिन उसे फिर से जीतने की शुरुआत भी उसी पल होती है, जब इंसान अपनी गलती स्वीकार कर लेता है।
_फिरदौस "kaSak"