बिना गिरे तो हमने यारों
चलना तक नहीं सीखा था
दिल तोड़कर इश्क़ सिखाना
खुदा का ही तरीका था...
उस एक इंसान के गलत होने से
इश्क़ को गलत क्यूँ कहे हम...
जब वो जिंदगी में खुश है
अकेली तन्हाई क्यूँ सहे हम
चलो शायर बन जाते हैं..
किसी को चाँद पुकारा करते हैं
दिल अब भी तो अपना है
हम इश्क़ दुबारा करते हैं..!!