यमुना धीरे बह रही , कदंब खड़ा उदास ।
राधा को याद हो आई,मोहन खेलते रास
बंसी की मीठी धुन गूॅंजती धरती आकाश ।
माखनचोर बसे हैं ज्यों पुहपुन में बास
नदिया तट पर गुमसुम बैठे शाम घिर आई।
अब जल्दी से दर्शन दे दो मेरे कृष्ण कन्हाई।
तुम बिन चैन नहीं एक पल, जबसे प्रीत लगाई।
जल में खुद को देखूं तो दिखे तुम्हारी परछाईं।
डॉ अमृता शुक्ला