हर बार समझौता करने वाला इंसान कमज़ोर नहीं होता,
वह बस अपने रिश्तों को बचाने की आख़िरी कोशिश कर रहा होता है।
जब अपने ही कह दें—
"रहना है तो रहो, नहीं तो मत रहो।"
और बार-बार यह एहसास दिलाया जाए कि
"तुम्हारा इस घर पर कोई हक़ नहीं।"
तब दर्द शब्दों से नहीं, ख़ामोशी से बहता है।
सबके लिए सोचने वाले अगर अपने ही बीवी-बच्चों की ज़रूरतें भूल जाएँ,
तो सबसे ज़्यादा टूटता वही परिवार है,
जो उनसे सबसे ज़्यादा प्यार करता है।
मैं किसी से शिकायत नहीं करूँगी,
न किसी का हक़ माँगूँगी।
बस हे ईश्वर, इतना सामर्थ्य देना कि
मैं अपनी मेहनत से एक-एक पैसा जोड़ सकूँ,
अपने बच्चों के सिर पर सम्मान की एक छत बना सकूँ।
ताकि कल उन्हें कभी यह न सुनना पड़े कि
"तुम्हारा कोई घर नहीं।"
मेरी सबसे बड़ी जीत किसी से कुछ छीनना नहीं होगी,
बल्कि अपने दम पर इतना बना लेना होगा कि
मेरे बच्चों को कभी अपना सम्मान साबित न करना पड़े।
क्योंकि घर सिर्फ़ ईंट और सीमेंट से नहीं बनता,
घर वहाँ बनता है जहाँ सम्मान, अपनापन और सुरक्षा साथ रहते हैं। ❤️🏡
आज मेरी जेब खाली है...
लेकिन मेरे हौसले खाली नहीं हैं।
हाँ, अभी शुरुआत है, इसलिए मुझे दुआओँ और साथ की ज़रूरत है।
हे ईश्वर, बस इतना सामर्थ्य देना कि अपनी मेहनत से इतना कमा सकूँ
कि अपने बच्चों के सिर पर सम्मान की एक छत खड़ी कर सकूँ।
मैं किसी से कुछ छीनना नहीं चाहती,
न किसी का हक़ माँगना चाहती हूँ।
बस इतना चाहती हूँ कि कल मेरे बच्चों को कभी यह न सुनना पड़े—
"तुम्हारा अपना कोई घर नहीं।"
मेरी मेहनत ही मेरी पहचान बने,
और मेरा आत्मसम्मान ही मेरी सबसे बड़ी दौलत। 🤍🏡