मैं और मेरे अह्सास
बदली
बदली में छुप गई है सितारों की बारात l
चांद सितारों के बिना सुनी है ये रात ll
यू तो कहीं कोई आसार नहीं थे बदली के l
लगता है कहीं दूर से किया है आयात ll
बेमान गरज रही है दिनभर पगली हुई सी l
बड़े अजीब दिखते आसमान के हालात ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह