मेहनत से लिखी तकदीर और ईमानदारी से खिंची लकीर को,
खुद भगवान भी तराजू पर तौलता है।
*********राज-मुकुट : वो राजा जिसके पैर में चप्पल नहीं थी*********
1920 में एक अंग्रेज ने कहा - 'अनपढ़'!
वो शब्द उसके दिल में तीर की तरह चुभ गया।
मंगलूरु स्टेशन, सिर पर संतरे की टोकरी,
पैरों में चप्पल तक नहीं, पर आँखों में एक सपना।
23 साल बाद, उसी 'अनपढ़' को लेने
राष्ट्रपति भवन से गाड़ी आई।
संतरे बेचकर जिसने स्कूल खरीद लिया,
वो नंगे पैर वाला राजा था - हरेकला हजाब्बा।
ये कहानी पढ़ो, और बताऔ कैसा लगा सच्चा सफर🔥✨
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