चिड़िया की तरह होती है स्त्री…
जैसे चिड़िया अपने बच्चों के लिए तिनका-तिनका जोड़कर घोंसला बनाती है, वैसे ही एक स्त्री भी अपना घर बनाने में पूरी उम्र लगा देती है।
एक-एक चीज़ जोड़ती है, रिश्ते संभालती है, अपनों के लिए खुद को भूल जाती है…
लेकिन कई बार उसके हिस्से में मेहनत के साथ अपने ही लोगों के ताने और अकेलापन आता है।
जिस घर को बनाने में उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी,
उसी घर में जब उसका साथ देने वाला कोई न हो,
तो उसके लिए हर तिनका जोड़ना कितना मुश्किल होता होगा…
यह वही स्त्री समझ सकती है, जो चुपचाप अपना घर बनाती रहती है। ❤️
- archana