हम औरतें कभी अपने पर होनेवाले अत्याचारों से मुक्त नहीं हो पाती।क्योंकि हम सहमकर घबरा जाती है ,चुप हो जाती है। नियति के सामने सर झुका देती है, ख़ुदमे ही कमियां ढूंढ लेती है। पर यह प्रण नहीं लेती के जो एक बार हुआ है वह फिर कभी नहीं होने देंगे।
- Sarika Sangani