जो नदी कल-कल करके बहती थी,
वो आज सूखी पड़ी है।
वक्त का स्वभाव ही परिवर्तन है,
यहाँ कुछ भी सदा एक-सा नहीं रहता।
सुख और दुःख भी जीवन की दो ऋतुएँ हैं
एक आती है, तो दूसरी के लिए राह छोड़ जाती है।
इसलिए दुःख से घबराना कैसा,
जो आज है, वह कल नहीं रहेगा।
और यदि आज जीवन सूना-सा लगता है,
तो विश्वास रखो
समय की धारा फिर किसी मोड़ पर
खुशियों को साथ लेकर लौटेगी।
ArUu ✍️