हमारी महान न्यायिक व्यवस्था ।
' एक मजदूर ने सारा जीवन जेल में काट दिया
फिर सालों बाद पता चला की वो निर्दोष था
कई बुजुर्गों को सलाकों के पीछे धकेल दिया
वजह यह थी की वो कभी जवानी में गुनहगार थे
सारे गुंडे मवाली सरेआम घूम रहे हैं बाजार में
सिर्फ़ दो दिन में पता चल जाता है की वो बेगुनाह थे
एक गरीब की चंपल घिस जाती है चौखट पर
न्यायालय देता रहता है सिर्फ़ तारीख पर तारीख
धनी के लिये आधी रात में कोर्ट खुल जाती हैं
और निर्धन बेचारा न्याय का भिखारी बन जाता हैं
यहीं बातों से महान देश का महान न्यायालय
' माहि ' मुझे इतना गुनहग़ार क्यों नजर आता हैं '