कविता
कुछ देर और ठहेर जाओ
कुछ देर और ठहर जाओ
रुक जाओ मेरे जुल्फों की छांव में
तेरे बिना चैन नहीं आती
यह ठहरी हुई निगाहे
तुम्हें ही आंखों में भरना चाह
तुम्हें जी भर चाहना तुम्हें देखे रहना
तुम्हारे आगोश में जीना
अगर यह सपना है तो
मैं चाहूं नींद कभी ना टूटे
सुबह कभी ना हो
पलके कभी ना उठे
रुक जाओ मेरी बाहों में
आकर तुम कहीं भी ना जाओ
ना जाओ कहीं दूर
यह भरम मेरा है तुम पास मेरे हो
तो रह जाओ कई सदी के लिए
धड़कन में मेरे समाकर
मेरी जिंदगी के लिए
प्यार में मुझे अपनी कैद करो
जज्बातों में फना होकर हो जाऊं बस मैं तेरा
पेऊ में वेरिया लगाओ
तेरे प्यार के नाम से हो तो
शौक से पहन लु मैं
अगर शौक तेरे चाहत है तो
यह शौक मैंने रखा है
और मैं चाहूं यह शौक कभी खत्म ना हो
दिन गुजरे सदी गुजरे गुजरे हजारों साल
मुझे शौक तुम्हारा हर पल हो हर लम्हा है हर दिन हो
एक दिन भी ना हो सदी तक में
जो मेरे दिल में तुम्हारे लिए
चाहत थोड़ी सी भी काम हुआ हो
मैं बस तुम्हें चाहूं
मैं चाहूं तुम रुक जाओ
मेरे साथ यहीं मेरे गोद में सर रखकर
जुल्फों के छांव में सो जाओ
तेरी मैं बावरी रहना चाहूं
वही जहां तेरे नाम जहां
मैं तेरे नाम पर ही जीना चाहता हूं
तू जहां तेरी चाहत जहां है
वहां शगुन है
अगर यह शगुन झूठ है तो
मैं झूठी शगुन पर ही
सदी सर्वसर करना चाहूं
और ना चाहूं मैं कुछ सदी बितने के बाद भी
तुम्हारा नाम लेकर मैं शगुन से जी ललु गी
चाहूं मैं तुम रहो मेरे साथ
ख्वाबों में ही सही
अगर यह ख्वाब है
तो मैं ख्वाबों में ही हूं हकीकत में
तुम बिन कुछ भी नहीं