हमें जो स्वस्थ यौवन मिला है तो
ईश्वर की 'श्रेष्ठ कृपा' है।
ये यौवन किसी इंसान को काम आता है,
तो यौवन सही अर्थ में 'सक्षम' है।
जो बच्चों को अपनी बाहुओं से उठाकर 'ख़ुश' कर सकें,
वो यौवन 'ममता का पर्याय' बन सकता हैं।
कोई स्त्री जब हो संकट में और उसकी रक्षा कर सकें,
सही में तब यह यौवन 'रक्षक' कहलाता है।
किसी वृद्ध के 'बुढ़ापे का सहारा' बन सके,
वो यौवन सही अर्थ में 'दयावान' है।