तुम्हारा साथ
बिन कहे जो दिल की हर बात पढ़ जाए, वो एहसास हो तुम,
भीड़ में भी जो सुकून दे जाए, वो खास हो तुम।
तपती धूप में जैसे ठहरती हुई कोई ठंडी हवा,
मेरे हर बिखरे पल को संभालता वो किनारा हो तुम।
तुम आए तो यूँ लगा जैसे वक्त ने करवट ली हो,
सूखी डाल पर चुपके से फिर ज़िंदगी खिली हो।
मुझे दुनिया की ख्वाहिश नहीं, न कोई और अरमान,
बस इतना काफी है — तुम रहो मेरे पास हर शाम।
तुम्हारी मुस्कान अब आदत सी बन गई है मेरी,
जैसे अंधेरे को रोशनी की ज़रूरत होती है गहरी।
ये रिश्ता लफ़्ज़ों का नहीं, खामोशी का पैगाम है,
जहाँ दिल ही समझे दिल को — वही सच्चा मुकाम है।
अगर कभी दूर भी हो जाओ, तो एहसास बनकर रहना,
मेरी हर धड़कन में, मेरी हर सांस में बस तुम ही बहना।...✍️