मैं और मेरे अह्सास
जिन्दा
बिन मौसम बरसातें लिखते रहना l
ख़ुद को भीगो कर यूँ खिलते रहना ll
दिल की दुनिया को ताज़ा रखने को l
बिन मतलब दोस्तों से मिलते रहना ll
बज़्म में रंगीली सी ग़ज़लें गाकर l
अपना टूटा जिगरा सिलते रहना ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह