झूठे और फरेबी लोगों की
तरक्की देखकर अक्सर लोग
दुष्कर्म करने को तैयार हो जाते है।
वे ये नहीं समझते है कि
उनका अधिक पैसे, धन,
संपत्ति आदि कमाना
उनकी तरक्की नहीं बल्कि,
उनके पिछले कर्मों का हिसाब है।
जब भी ये हिसाब पूरा होगा,
उनके कर्मों का उन्हें ,
न्यायपूर्ण सबक मिलेगा।
भूरे व्यक्ति को पहले तरक्की
रूपी भ्रम में रखा जाता है।
ताकि उसका विनाश बहुत भ्रमक हो
जबकि एक सदाचार के रास्ते
चलने वाले व्यक्ति को,
उसके भूरे कर्मों का फल,
पहले मिलता है ।
यदि वह उसे झेल ले
तो आगे उसे सर्वव्यापी आनंद
उसे प्राप्त जरूर होगा।