इश्क़ इश्क़ करता है ज़माना, कोई इश्क़ से वाकिफ़, हमें भी करवाओ,,
अगर जीने मरने का सौदा होता है, कोई इश्क़-ओ-दुकान पे, हमें भी ले जाओ,,
कहते है, आंखों आंखों में होता है ये इश्क़, अंधे क्या करते है फिर ? उस अंधाधुंध मौत से, हमें भी मिलवाओ,,
ममता तौबा करके ऐतबार भी करले, ऐ इश्क़ करने वालो, सूरमा-ए-इंतज़ार मिटा के, आंसू पीना हमें भी सिखाओ।