09/05/2026
विषय -अलग अलग कितने,
अलग-अलग कितने रूप होते हैं नारी के।
माता बनकर स्नेह लुंटाती है बच्चों पर।।
पतिव्रता बनकर हर धर्म-कर्म निभाती है।
परिवार को संजोए रखने के लिए समर्पित है।।
बेटी बनकर मात-पिता का ख्याल रखती है।
एक शिक्षीत नारी से दो कुलों सु-शोभित है।।
स्वरचित एवं मौलिक
©® डॉ दमयंती भट्ट