किस्मत से मिलते हैं पार्ट 2
जो भी यहां मिलते हैं
दयावान वो किस्मत नहीं
जो किसी पे रेहमत बरसाए
ताकतवर वह लोग हैं
जो किस्मत को अपने मेहरून बनाए
झूठ है यह कहने को किस्मत से ही मिलता है
जो भी यहां मिलता है
किस्मत बस एक नाम है
अपने कायरता और नाकामयाबी को छुपाने के लिए
और यही तो है धर्म का धंधा
नाकामयाबी हर दुखी मन का फंडा
किस्मत को कोश कोश के बैठे
फिर लग जाते हैं
अंधविश्वास को भगवान बनाने
किसी सत्याग्रह के मूल्य धूप सुनने
किसी इंसान को भगवान बनाकर कर पूजने
या दिल के जज्बाते
गहरी जन्नत दिखा दे
और फिर नर्क में ले जाते हैं
नहीं पता क्यों दिल लगा के सब खाया
हम अपना भी ना कभी हो सका
मूल्य धूप सुनते त्याग दी मोह माया
वह मोह माया जिसमें बंध के कर्मकांड हमारे थे बढे
जब से छोड़ा मोह माया
करम कांड है
पर फिर भी हम दासी भगवान के
और बढ़ते क्रम कांड
और हम यह हमारे अभियान के
स्वयं भक्त हम महाकाल के
आचरन हमारे कितने भी हो मेले
हमने जब पहने हैं सफेद कपड़े की
चांद की मखमली जैसी रोशन कपड़े
दाग है यह वेदाग है
हम पुण्य आत्मा
हमारे लिए सब जायज है
किस्मत के भरोसे हम भी उनके रखते हैं
जो खुद से डरते ही रहते हैं
जो लाचार परे बेवस
हम उनकी भावनाओं की कीमत
खुद को ईशवर बात कर लगाते हैं
क्या पाप क्या पुण्य
पाप भी हमारे लिए पुण्य बन जाते हैं
और इससे सत्याग्रह में
झूठ को ही हम सच बताते हैं
नहीं बताते हम इंसान की डर है भरम
और हम उनके डर की ही फायदा उठाते हैं
नहीं बताते हम उनकी कमजोरी ही उनको खा जाता है
और उनकी कमजोरी ही हमे भगवान बनाते हैं
किस्मत की भरोसे उन्हें रखते हैं
हम अपने झूठ के ही भरोसे ही
दुनिया को खोखली कर जाते हैं
हां यह जानते हैं हम
हम जान किसी के लेकर
हम अजेय हो जाएं गे
अजय हो जाते हैं
अंतहीन समय के लिए
हम उनके लिए देवता बन जाते हैं
और उन्हें हम बताते हैं
यही किस्मत है
और हमें पूजना तुम्हारे धर्म है
और इस धर्म का पालन करो हमारे सुमीरन करो
हम तुम्हारे इशवर जसे ही पूजनेय हैं
हां हम तुम्हारे पूजनेय हैं