हमारी पीढी मे पिता को देखकर पुत्र कुछ बोलते नही थे, ऐसा वे इसलिए करते थे, क्योंकि हमारी पीढी के हृदय मे प्रेम का अनुशासन होता था ।
आज की पीढी अनुशासन क्या है जानती ही नही, पुत्र के सामने माता पिता कलह न हो इस लिए मौन रहते है । हमारी बूढी आंखे आशंकाओ से घिरी रहती है । मरने का डर नही है हम इस पीढी की मानसिकता समझते है ।
आज की पीढी कर्तव्य भूल गयी है अधिकार याद रखती है ।
- कैप्टन