दिव्य संदेश
जब भी जीवन में कोई विकट परिस्थिति सामने आए, तो सबसे पहले यह स्वीकार कर लें कि यह आपके ही किसी पुराने कर्म का हिसाब चुकता करने आई है। इस दुनिया में कोई भी संयोग स्थायी नहीं है, जो आया है उसका जाना निश्चित है। संकट के समय घबराने की बजाय शांत रहकर उसे केवल बीतते हुए देखें। परिस्थिति को दोषी मानना बंद करें, यह सब 'व्यवस्थित' के नियम से है। टकराव में उलझने की बजाय समता भाव से रास्ता निकालना ही मुश्किलों से मुक्ति की चाबी है।