आसमान
मुझे पसंद है
खुले आसमान को देखना,
उसके बदलते रंगों को महसूस करना।
सुबह
पानी-सा साफ़,
निश्छल, ठहरा हुआ।
आधा गुज़रा दिन
चमकता नीला,
उम्मीदों की तरह उजला।
ढलती शाम
कभी केसरिया,
कभी सुनहरी उदासी में लिपटी।
और रात
जब चाँद उतरता है,
तो अँधेरी चाँदनी में
ख़ामोश रौशनी बिखर जाती है।
पर इन सब से ज़्यादा
मुझे पसंद है ये जानना
कि इतने रंग बदलने के बाद भी
आसमान
सदियों से
एक ही जगह ठहरा है।
न भागता है,
न थकता है,
बस रहता है…
सब कुछ सहते हुए।
प्राची तंवर…..