ये वसुंधरा हरी-भरी.......
ये वसुंधरा हरी-भरी, कितनी हसीन है।
यह जन्म भूमि है मेरी, पावन जमीन है।।
देवों की जन्म भूमि यह,शत्-शत् करें नमन।
माँ भारती की स्तुति पर, हमको यकीन है।।
शुभ संस्कार सभ्यता है, यह संस्कृति महान।
राम-कृष्ण-बुद्ध की धरा, भारत कुलीन है।।
हिमालय हमारा रक्षक,शिव-शक्ति की कृपा।*
माँ के चरण पखारता, सागर प्रवीन है।
मौसम बिखेरे रँग यहाँ, नाचे मन मलंग।
उमंगें हरेक पर्व में, हर भक्त लीन है।।
है देश यह सपेरों का, किसी ने यह कहा।
बदला है देखिए अभी, कितना नवीन है।।
निर्माण का संकल्प ले, बढ़ते कदम रहे।
प्रगतिशील है हरेक पथ, उन्नत मशीन है।।
दुश्मन पड़ोसी में बसे, हैं हर घड़ी लड़े।
आतंकी पाक को अभी, लड़ाता चीन है।।
ब्रम्होस को हमने चला, जग को दिखा दिया।
हिन्दुस्ताँ बदल चुका है, शत्रु-दहन-सीन है।।
मनोजकुमार शुक्ल मनोज
23/6/26