दहाड़: रुकूँगा नहीं!
लाख बार गिरूँगा नीचे, फिर उठ कर खड़ा रहूँगा मैं,
पर हार मान कर कायर सा, इस मोड़ पर बैठूँगा नहीं।
तूफान आए या आए प्रलय, हर दर्द हँस कर सहूँगा मैं,
सौ बार भले गिरना पड़े, पर कदम पीछे खींचूँगा नहीं।
रुकूँगा नहीं, थकूँगा नहीं, अब पाँव आगे बढ़ाना है,
अंगारों पर चल कर मुझको, अपनी सोई किस्मत जगाना है।
हौसले बुलंद हैं फौलाद जैसे, संकट से अब झुकूँगा नहीं,
चाहे मौत सामने खड़ी रहे, मैं लड़ूँगा, पीछे हटूँगा नहीं।
कामयाबी हासिल करनी है, यह ज़िद्द है मेरी, हार नहीं,
मंज़िल को पाकर दम लूँगा, बीच राह में विश्राम नहीं।
कामयाबी तक रुकूँगा नहीं, मैंने खुद से यह वादा किया,
इतिहास रचेगा नाम मेरा, मैंने जंग का शंखनाद किया