प्रतिक्षा - क्षणिका विधा
प्रेम में तेरी प्रतिक्षा, सदियों सी हैं |
नेत्र में तेरी स्मृति, धुंधली सी हैं |
मन में तेरी कुतुहल, पतझड़ सी हैं |
तन में तेरी हलचल, मझधार सी हैं |
स्पर्श में तेरी सुरसुरी, पत्थर सी हैं |
हृदय में तेरी अनुपस्थित, बंजर सी हैं |
श्वास में तेरी अनुकंपा, शिथील सी हैं |
कदाचित.., पुन: मिलन की आश में
मैं शून्य, मौन बैठा हूँ !
केवल तुम्हें देखने ||
©_® शेखर खराड़ी
तिथि-१५/७/२०२६